हमारी बहनें
हमारी बहनें कदम से कदम कदम
मिलाकर हमारे साथ ही नही चलती,
हमसे भी आगे बढ़कर मुकाबलें जीत
लेती है ,
अब हारना उन्हें कचोटता है ,
हमारी बहने जीत लेती है सारी
उचाइयां l
हमारी बहने मायूस नहीं होती अपने
सावले रंग से ,
अपने सुनहरे सपनो को पूरा करती
हैं अपने मजबूत इरादों से ,
लोग क्या कहेंगे ? से नही डरतीं
हैं,
हमारी बहने सीख चुकी हैं खुश होना
l
हमारी बहनें रोती नहीं है अपने
तकदीर पर ,
निपट लेती है कठिनाइयों से ,
अकेले करती है मुकाबला
तोड़ देती है रूढ़ीवाद के सारे
बेड़ियाँ ,
हमारी बहने अब अपने पैरों में
काला धागा नहीं बांधती हैं l
---- कुशल
कान्त पन्त
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