मुलाकात
अगर तितलियों से मिला मै कभी रास्ते में ,
या कभी लहलहाती फसलो से मिला,
या जब कभी किसी तालाब से मिलूँगा ,
या अगर किसी किताब से मिलू मै चाय पर ,
या कभी किसी फूल से मिलना हुआ मेरा ,
या कभी किसी दिन चाँद मिला मुझे किसी मोड़ पर ,
या अगर कभी मै किसी नदी से मिलूँगा ,
या किसी रोज किसी झरने से मिलना पड़ा मुझे ,
या फिर किसी रोज महासागर से मिलना हुआ मेरा ,
या किसी दिन मौत मेरे दरवाजे पर दस्तक देगी ,
तो मै उन सबको बताऊंगा उस दिन ,
तुम्हारे और मेरे मुलाकात के बारे में ,
की मै एक दिन “तुमसे” मिला था l
--- कुशल कांत
पंत

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